ओप्पो वीवो के फ़िल्टर लगाना न आया कोई काम तू तब भी चुड़ैल थी अब भी चुड़ैल है। ओप्पो वीवो के फ़िल्टर लगाना न आया कोई काम तू तब भी चुड़ैल थी अब भी चुड़ैल...
चलकर ही तुमने जाना मुश्किल है सबको समझाना। चलकर ही तुमने जाना मुश्किल है सबको समझाना।
और अब उसकी पहचान किसी गैर की मोहताज नहीं। और अब उसकी पहचान किसी गैर की मोहताज नहीं।
उसके लिए, जो हो उचित, वो करना पड़ता, जिससेे न आए, कोई कठिनाई। उसके लिए, जो हो उचित, वो करना पड़ता, जिससेे न आए, कोई कठिनाई।
और कोई मुंह घुमा के चला जाता है। और कोई मुंह घुमा के चला जाता है।
मैं लिखता वह मन की भाषा, पर तेरी है क्या अभिलाषा? मैं लिखता वह मन की भाषा, पर तेरी है क्या अभिलाषा?